लोग खड़े–खड़े देख रहे थे, और सरदार भी ठट्ठा कर करके कहते थे : “इसने दूसरों को बचाया, यदि यह परमेश्वर का मसीह है, और उसका चुना हुआ है, तो अपने आप को बचा ले।”