परन्तु योनातान ने अपने पिता को लोगों को शपथ धराते न सुना था, इसलिये उसने अपने हाथ की छड़ी की नोक बढ़ाकर मधु के छते में डुबाया, और अपना हाथ अपने मुँह तक ले गया; तब उसकी आँखों में ज्योंति आई।